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दिनकर का हिमालय

दिनकर की कविता ‘हिमालय’। सन् 1933 में लिखित यह कविता ‘रेणुका’ काव्य-संग्रह का हिस्सा है। ‘मेरे नगपति, मेरे विशाल’! “मेरे भारत के दिव्य भाल! मेरे नगपति! मेरे विशाल! … ओ, मौन, तपस्या लीन यति! पल भर को तो कर दृगन्मेष रे ज्वालाओं से दग्ध, विकल है तड़प रहा पद पर …

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