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शिवदीप वामन लांडे – माफिया और गुंडों का काल

Published Date: November 22, 2016

शिवदीप वामन लांडे बिहार कैडर के एसपी है और इनका ट्रांसफर अपने गृह-राज्य महाराष्ट्र हो चूका है। शिवदीप सिर्फ एक पुलिस अफसर ही नहीं बल्कि फिल्मो के उस हर दिल अज़ीज़ करैक्टर की तरह है जिन्हें असल जिंदगी में किसी समाज में पाना एक चमत्कार सा है। शिवदीप का बिहार में कार्यकाल काफी रोमांच से भरा था चाहे मुंगेर हो, पूर्णिया हो, अररिया हो या पटना हो। इन्होंने दवाई माफिया, गैरकानूनी दारु दूकान, गुंडे टाइप मजनू, माइनिंग माफिया और न जाने कितनो से लोहा भी लिया और बिलकुल फ़िल्मी अंदाज़ में उनका सफाया भी किया। कभी चलती मोटरसाइकिल से कूद जाते तो कभी चलती मोटरसाइकिल के सामने खड़े हो जाते। कभी गुंडे को पकड़ने के लिए गमछे में बहरूपिया टाइप पहुँच जाते तो कभी खुद ही जेसीबी मशीन चलाकर माइनिंग माफिया का जुगाड़ ध्वस्त कर देते।

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शिवदीप वामन लांडे ने अपने फेसबुक पेज पर ट्रांसफर की खबर और बिहार के प्रति अपने स्नेह पर लिखा :-

‘बिहार’ ये महज़ एक राज्य का नाम नहीं है मेरे लिए पर मेरे जीवन का एक सबसे बड़ा और प्रिय अंश है। हम कहाँ और किसके यहाँ पैदा हो ये हमारे वश में नहीं, हमारा नाम भी हमारे होश के पहले तय कर दिया जाता है। बचपन का पहला समझ आने पे हम देश, राज्य, धर्म और विश्वाशों के बीच में खुद को पाते हैं।

बचपन से ही मुझे कुछ अलग हट कर करने का जुनून था। अत्यंत आभाव था घर में पर वो मजबूरियाँ भी कभी मेरे पैरों की बेरियाँ बनने की सफलता नहीं पा सकी। महाराष्ट के एक प्रसिद्ध कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी और फिर I.R.S. का पदभार भी मुझे बहुत दिनों तक रोक नहीं पाया। 2006 में I.P.S. की सफलता और फिर बिहार को बतौर राज्य मिलना मेरे जीवन का लक्ष्य तय करने वाला था।

बिहार ने मुझे इन आठ वर्षों के नियुक्ति में मुझे बहुत सारे याद संजोने को दिया है। मुंगेर से तबादले के बाद 6 k.m. तक फूलों से विदा करना, भीषण ठण्ड में पटना से मेरे तबादला में लोगो का भूख हड़ताल, अररिया से तबादले पे मुझे 48 घंटों तक लोगो ने मुझे जिला से बाहर न जाने दिया, रोहतास में पत्थर माफियों के खिलाफ मेरे मुहीम में सबका मेरा साथ और अनेकों मौकों पर सबका मेरे साथ खड़ा होना शायद हमेशा मेरे दिल में रहेगा। अनेकों बार मुझपे जानलेवा हमले हुए लेकिन फिर भी अगर मुझे बिहार के रक्षा में अपनी जान भी देनी होती तो शायद बहुत कम होता।

मेरी नियुक्ति जहाँ भी रही मुझे लोगों ने अपनाया है। मैं अपने अभिवावक तुल्य मेरे सीनियर्स, मीडिया के भाई, मेरे साथ काम कर रहे मेरे मित्र और मेरे सम्पूर्ण परिवार बिहार की जनता का मैं पुरे दिल से धन्यवाद देता हूं। मीडिया के भाइयों ने कभी मुझे ‘दबंग’, ‘सिंघम’, ‘रोबिन हुड’ और न जाने कितने उपनाम दिए पर मुझे ख़ुशी है कि मेरे मित्रों ने मुझे मेरे मेरे ‘शिवदीप’ नाम से बुलाना ज्यादा पसंद किया है। मैं हमेशा आपका अपना शिवदीप ही रहना चाहता हूँ।

मेरा प्रतिनियुकी आज अगले तीन वर्षों के लिए महाराष्ट हुआ है। जब मैंने पुलिस सर्विश को अपनाया तो फिर केंद्र सरकार के आह्वाहन पे मुझे कहीं भी अपना फ़र्ज़ को निभाना होगा। मैं जन्म से शायद महाराष्ट का हूँ पर अपने कर्म और मन से पूरा बिहारी हूँ। बिहार की शान को बढ़ाना ही मेरा शौभाग्य होगा।

जय हिंद।।

 

शिवदीप महाराष्ट्र के अकोला के रहने वाले हैं। इलेक्ट्रिकल में इंजीनियरिंग की है। पहले लेक्चरार रहे, फिर आईआरएस में भी गए। फिर परीक्षा दी और पुलिस में आ गये। बिहार कैडर ज्वाइन करने के बाद काफी अच्छा काम किया। इतना बेहतर काम कि किसी भी जिले से ट्रांसफर के वक्त वहाँ का समाज इन्हें जाने देना नहीं चाहता था।

शिवदीप की शादी हो चुकी है और एक प्यारी सी बेटी भी है।