Saturday , December 3 2022

Politics

मैं अन्ना नहीं !!

(यह लेख अनुपम ने वर्ष 2011 में तब लिखा था जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन अपने चरम पर था। ऐसे दौर में जब हर तरफ लोग “मैं अन्ना हूँ” की टोपी पहनकर घूम रहे थे, उसी वक़्त अनुपम ने यह लेख लिखा था।) बड़े दिनों से कुछ लिखने …

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निखिल डे – जिन्होंने अपना निखिल जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया है

“जीवन उनका नही युधिष्ठिर, जो उससे डरते हैं, वह उनका, जो चरण रोप, निर्भय होकर लड़ते हैं, मही नही जीवित है, मिट्टी से डरनेवालों से, जीवित है यह, उसे फूंक,  सोना करनेवालों से “ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी रचना ‘कुरुक्षेत्र’ से उद्धृत उपरोक्त पंक्तियाँ सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे …

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स्वच्छता ही स्वच्छता ..

स्वच्छता ज़मीन पर भी हो स्वच्छता समाज में भी हो नेताओं की भक्ति न करें स्वच्छता दिमाग में भी हो डिबेट हो गलत सरकारी नीतियों पर ना कि हिन्दू-मुस्लिम लड़वाने पर सवाल हो गलत सरकारी नीतियों पर ना कि नागरिकों को ही हरवाने पर सरकार जनहित के काम करे जन …

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