Saturday , December 3 2022

Abhinav Singh

Media Professional & Poet

मिट्टी से ही बना हूँ ..

मिट्टी से ही बना हूँ मिट्टी में ही मिल जाऊँगा एक दिन के लिए ही सही तुम्हारे घर की रौशनी और रौनक बन जाऊँगा मुझे नज़रअंदाज़ ना करना मुझे अपनाए रखना इलेक्ट्रॉनिक दीये से सस्ते में मिल जाऊँगा एक दिन के लिए ही सही जगमगाते पलों सा एक खूबसूरत याद …

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मेरी मोहब्बत ..

श्रृंगार शब्दों से कविता की भाषा में पढूं तेरे लिए ज़ुबाँ इसी आशा में तारीफ़ जो तूने की पढ़ना हुआ सफल ज़िन्दगी मिल गयी एक नई परिभाषा में तुम हो तो इश्क़ है बिन तेरे ही अश्क है गीतों में जो तुम नहीं लिखना ही खुश्क है कुछ लिख मैं …

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स्वच्छता ही स्वच्छता ..

स्वच्छता ज़मीन पर भी हो स्वच्छता समाज में भी हो नेताओं की भक्ति न करें स्वच्छता दिमाग में भी हो डिबेट हो गलत सरकारी नीतियों पर ना कि हिन्दू-मुस्लिम लड़वाने पर सवाल हो गलत सरकारी नीतियों पर ना कि नागरिकों को ही हरवाने पर सरकार जनहित के काम करे जन …

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